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आतुर मन

 ये आतुर मन मेरा खिंचता जा रहा तुम्हारी ही ओर ईश्वर ने बाँध दी है कोई पावन सी अनमोल डोर यूँ हर पल आपका ही ख्याल, ख्याल मे सौ सवाल  सजा लूँ बना के काजल तुम्हें नयनों के कोर तुम्हारी प्रेम की अनुभूति से होने लगे मन प्रसन्न  जिस्म का किस्सा नहीं है हम बसे दो छोर बस यही मांगूं की आपका साथ ऐसे ही बना रहे  आपका ही नाम गूंजे मेरे कानो मे चाहे जितना हो शोर #बज़्म 

मेरी खुसी

 मेरी खुसी का खजाना आप हो मेरे प्रेम हो मेरा संपूर्ण आप हो  एक स्त्री को इज्जत तव्वजो प्रेम  सब आप देना जानते हो इसलिए खास आप हो  आप से मिलकर ही मेरी खुशी आई है  मैं गम का आंसू मेरी मुस्कान आप हो  #love shayri 

यही

 समझ ती हूँ मैं.. तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है... समझ ती हूँ मैं... तुम्हारे पास हूँ फिर भी दूरी है..... समझती हूँ मैं... तुम्हें मैं भूल जाऊँगी ये मुमकिन नहीं, लेकिन.. तुम्हीं को भूलना मेरी सबसे बड़ी है मजबूरी...

यही

यही इल्तिज़ा करूंगी  आज अपने मेहरबां से मेरे लब ना कह सकेंगें जिसे उम्र भर ज़ुबां से मेरी बेज़ुबां नज़र से मेरा वो पयाम ले लो मेरा सलाम ले लो एक बार और प्यार से मेरा नाम ले लो  जिन्दगी में बस यही ख्वाहिश है आखिरी  चाहे तो कल या फिर इसे आज ले लो 

तुम्हारी याद

 नज़र छैली,  मन बहका  और  उम्मीद पावन हो जाती है,  तुम्हारी यादें . .बन के घटा जब  सावन हो जातीं हैं ....❤️.... जल जाती है हर बुराई यूँ धु धु करके दशहरे पर जैसे पुतला कोई रावण हो जाती है 

Said shayri

 किसने दस्तक दी किसने ज़ख्म को दुखाया होगा हमने तो रहना सीख लिया तन्हा फिर कौन आया होगा दर्द बहुत तन्हा हमने सहे है  दर्द के साथ एक उम्र रहे हैं  इश्क नहीं है उनसे हमे  सिद्दत वाला क्या सामान्य क्या  चलो अच्छा हुआ दर्द के दरिया उफान पर आए  कुछ लोग सहारे नाव के आगे निकल आए  कभी तो समझ पाते तुम चाहत हमारी  ये इश्क था कोई इत्तेफ़ाक नहीं जनाब  कहीं कोई मिले तो बताना उसे  इश्क मत करना समझाना उसे  ये जो मेरा हाल है हमेशा से नहीं था  एक खुदा था जो आज जैसा नहीं था  यूँ इतने दर्द देकर क्या हासिल कर लोगे  खुद की तसल्ली है या अपना जीना दुश्वार कर लोगे  कभी तो कोई पूछता वज़ह हम से  क्यूँ नहीं किया जाता है अब इश्क हम से  राज की बात है दिल कहने से डरता है  तन्हाई से नहीं लोगों से डर लगता है Said shayri new 

इश्क

चाहत हो या राहत  जो भी है आपसे ही हैं❣️ ये रूठना ये मान जाना  जो भी है आपसे ही है❣️ तन, बदन, मन कण कण मे  साँस मेरा वज़ूद आपसे ही है  भूल गई थी हँसना मैं साहेब  मेरे चेहरे पर हंसी की आहट आपसे ही है❣️ मेरी रूह की राहत... जो भी है आपसे ही हैं❣️ #सारीका 

कौन मिल जाएगा

 तलाश करू भी तो कौन मिल जायेगा, कहा उसकी जुबां पर मेरा नाम हमेशा आएगा  दूर से दिखता है चाँद भी प्यारा सभी को  ये भी कोई चाँद है कहेंगे सब जब करीब आएगा  तुम्हारे साथ हंस लेते हैं हम खुल के पिया  तुम नहीं रहोगे जब करीब तो आईना भी रूलाएगा कैसे बयां करूँ हालत अपने दिल की अब बताओ  बारिश का मौसम भी जब आएगा आग लगाएगा  जली हूँ सारी जिंदगी पग पग पर मे निशान देख लो  वक़्त का क्या है जो मेरे जख्म पर मरहम लगाएगा  मैं मौन हूँ इसका ये मतलब नहीं कि शब्द नहीं हैं पिया  मेरे शब्द जब निकलेंगे तो हर एक शब्द तेरा दिल दुखाएगा

कुछ राज

कभी बहती है कभी चुप रहती है ये आंखे मेरी लबालब रहती है  ज़माने को दिखान समेटे मुस्कान फरेबी  मेरी जिन्दगी तन्हाई में जलती रहती है  एक औरत के लिए क्या जीना क्या मरण हर परिस्तिथी मे कोई ना कोई चिंता रहती है  आज के दौर में कितने उलाहने दिए जाते हैं  फरेब के बादल बे वज़ह बरसा दिए जाते हैं  पर क्यूँ एक मुस्कान की ख्वाहिश कोई गुनाह तो नहीं  क्यूँ नहीं लिखी है ऊपर वाले ने हर स्त्री के जीवन में खुशी  बे जान बंजर से समझ ली है दुनिया वालों ने बस मुरत कोई  .... 

एक स्त्री

 एक स्त्री बताना चाहती है हर बात उसे जो उसके मन का मीत हो  सारे राज ह्रदय तल के गहराई मे दबे हुए  जिसको सुनकर साथी प्रतिक्रिया दे अपनी  मगर अक्सर सुना नहीं पाती किसी डर के कारण जो कि उसके मन में व्याप्त हो जाता ज़माने को देख कर  वो कह भी नहीं पाती सह भी नहीं पाती घुटन मे जीती रहती है  ना जाने क्यूँ बेवजह आखिर उसे ये घुटन सहन करना होता है  वो कह कर दिल की बात हल्की भी हो सकती है मगर...  सिर्फ एक मगर के ख्याल से मौन वो मायूस सी सहती रहती है हर मर्ज भीतर अपने 

नशा

धडकन में नशा  तेरे इंतजार का है,  दिल में नशा  तेरे दीदार का है पिया  न होश में ला मुझे मेरे पिया  मदहोश ही रहने दे मुझे तेरे ख्याल मैं  तेरे इन नैंनों में नशा जो है  अब मेरे प्यार का है   मैं कर रही हूं इंतजार तुम्हारा  तुम लाऔगे वो लाल कंगन  अपने हाथ से मुझे पहनाओगे मेरी उडती जुल्फों को तुम  अपने हाथो से थाम कर जब  मेरे कान के पीछे लगाओगे देखो ना मेरे इंतजार की आरज़ू आओगे  ना मेरी इस उम्मीद को पूरा करने... ❤ 

पिया

  हे मेरे पिया  हम खोये हैं तुम्हारे ख्यालों में. देखो  ज़माने का कोई होश नहीं मुझे  न समझो हमें तुम मामूली  मेरे दिल में पिया तेरे सिवा कोई और नहीं  चला तेरा जादू कुछ ऐसा  पिया  बस धड़कन ही खामोश नहीं   मेरे मन के मीत , अब नज़रें हो गईं बस तेरी  तुने क्या जादू किया कि खुद का कोई होश नहीं 

क्या बात है

 तुम्हारे बिना दिल नहीं लगता जाने कौन सा तुमने जादू किया पिया  मैं बन के जोगन मैं तेरे स्नेह की छाया में बाट तेरी निहारूं पिया जी  कब आओगे कब आओगे ये सोचूँ  मेरी विरह की गवाह है ये साँझ पिया 

मैं सुन रही हूँ

 कितनी मोहब्बत है तुम्हें  आज तुम मुझसे इजहार कर दो मैं सुन रही हूं तुम्हें आज  अधूरी सारी बातें बाहर कर दो बहुत हो गई गलतफहमी हमारे बीच  बहुत हो गए गिले शिकवे नफरत के बीज  आज मौका है सनम तुम्हारे पास  आखिरी ही सही जाया न करो दिल की सारी बातें आज तुम बयां कर दो  ये मौका शायद फिर दोबारा न मिले कल  आज मौका है  पास तुम्हारे  दफ़न कर दो सारे गिले आज  जितने ख्वाब देखे है तुमने मेरे लिए  आज सारे हकीकत में बदल लो आओ  मैं आज सुन रही हूं तुम्हें प्रीतम  बाकी सारी बातें बाहर कर दो कितनी मोहब्बत है  आज तुम इजहार प्यार का इज़हार कर दो बरसो जली हूँ धूल मे मिली हूं आज तुम मिलकर मेरा सृजन कर दो  गुस्से में अक्सर लड़ती हूँ तुमसे, दूर जाने की बात करती हूं तुमसे,  आत्मा शरीर का वियोग क्या होता है वर्णन कर दो..... ❤  #सारीका #sahyri 

मेरी मोहब्बत

 हर घड़ी भारी है मेरी तेरे जाने के बाद,  तेरे साथ ही चली है मेरी रूह साथ साथ   जीना तो हर हाल में है,  गम जुदाई का सहना हर हाल में है। इससे ज्यादा तेरे करीब हम क्या होंगे,  जुदा तो तब होंगे जब हम मिले होंगे  निभाया है मैंने रिश्ता वादे करने मुझे नहीं आते,  मेरी  हर एक सांस करती है जिक्र तेरे मेरी मोहब्बत की इतनी सी है दास्तां। बुरा सा लगता है ग़र तू कहीं और महके  तड़पती है मेरी रूह तेरी ही खुशबू के लिए।

क्या है

 ऐसी बातों का बताओ मसला क्या है मैं खराब हूं मान लो बताओ तुम्हारा फैसला क्या है 

नियत

 औरत को भी छूने के तरीके होते हैं  एक स्पर्श अपने पन का जिसमें प्रेम होता है  अब ये आपकी नियत पर है कि आप उसका जिस्म छूते हो या रूह हर किसी को तलब है आज कल  सच्चा प्यार मिल पाना मुश्किल जैसे 

मोहब्बत

 मोहब्बत भी अधूरी रही। इंतजार भी अधूरा रहा मैं कब मुक्कमल हुई  मेरा वज़ूद भी अधूरा रहा जैसे चाँद को ताकते है सब वैसे ही मैंने ताका तुम्हें खिड़की से ... 

ऐसी बात

 ऐसी बात हो तो तुम मुक़र जाना मुझसे कभी इश्क़ था भूल जाना... तेरी सासों पे मेरी सासें बोझ़ लगने लगे मेरे ख्वाब तेरी आखों में चुभने लगे रास्ते मेरे कारण ठहरने लगे रुसवाईयों के अंधेरे घिरने लगे तो चुपचाप उठ़कर चले जाना,.. मैं धडकन हूं थोडा समझ़ जाऊंगी एक अंधेरी गली में मुड जाऊंगी इश्क में ऐसे मोड़ भी आते है दिलबर अकेले छोड़ जाते है जितना नहीं समझ़ पायी  तुम समझाने मत आना मैं एक यादों की दोहर सी लूंगी बर्फीली रातें काट लूंगी इश्क में इतना तो करना पड़ता है.. वर्ना तुम ही कहो, ऐसे भी कोई इश्क करता है मैं तुझमें ही रहुंगी इतना मान लेना... ऐसी बात हो तो तुम मुक़र जाना... मुझसे कभी इश्क था भूल ही जाना... मगर ये सोचना जरूर की ऐसे छोड़कर कौन जाता है  बन कर हवा का झोका महबूब अक्सर सताता है  जो अपना हो वो कभी भी हाथ नहीं छुड़ाता है.  अक्सर तुझे खोने से मेरा दिल डर जाता है... ❤ 

मिला करो

 तुम ख़्वाब बन कर मिला करो मुझे  चांदनी रात बनकर मिला करो कोई जुदा नहीं कर सकता है हमे तुम जुबां पर बात बनकर मिला करो  कितने दर्द सहे है अकेले मैंने प्रीतम  अब तुम रोज मुझे हम दर्द बनकर मिला करो  कभी किसी ने तंज कसा कभी किसी ने मारा ताना  अब तुम मुझे मेरे दिल का आराम बनकर मिला करो  तुमने ही मुझे दी है वज़ह मुझे हंसने की सनम तुम मुझे हर दिन सुबह का नाम बनकर मिला करो  बहुत खुश हूं तुम्हें पाकर मैं बता नहीं सकती हूं  हर जन्म इसी जन्म की तरह बनकर मिला करो  #सारीका शायरी 

प्रेम

 हमने प्रेम किया  और क्या अद्भुत प्रेम...❣ हाँ किया है मैंने एक अद्भुत प्रेम... जिसके साथ पल भर बैठ कर बाते न कर सके.. हमने उससे प्रेम किया है.. जिसके साथ एक कप चाय की चुस्की न ले सके.. हमने उससे प्रेम किया है... जिसके साथ बाइक पर बैठ कर दूर गगन तक न जा सके.... हमने उससे प्रेम किया है... जिसको जी भर न देख सके... हमने उससे प्रेम किया है... जिसके साथ बैठ कर दो पल की बाते न कर सके.... हमने उससे प्रेम किया है.... जिसकी कोई भी एक निशानी मेरे पास नहीं है... हमने उससे प्रेम किया है... जिसने बदले में कोई उम्मीद न रखी ना शर्त .... हमने उससे प्रेम किया है... सच तो यह है कि... हमने सपनों से प्रेम किया है... जिक्र जब भी करती हू आसमान से तुम्हारा.. न जाने बदलो को क्यूँ होती है जलन... क्या सपने पुरे होते हैं कभी.. क्यूँ होती है तकदीर को जलन