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दिसंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नेक l नेकी ग़ज़ल l मोहब्बत ग़ज़ल

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 बहुत नेक होते हैं वो लोग जो किसी की राह में,  कभी भी अपने प्रपंच से कांटे नहीं बोते ll भला करने वाले नेकी करने वाले इस ज़माने में,  किसी को गिराने के लिए साजिश नहीं ढोते ll खुदा दे ऐसी शख्सियतों को और इस चमन में,  जो किसी के बगीचे में पतझर की वज़ह नहीं होते ll नेकी वाले लोगों के कारण आज इंसानियत का नाम है,  वर्ना आजकल तो खून रिश्ते भी अपने नहीं होते ll क्या बात है हम मे जो इतना इश्क करते हो क्या हमारी याद मे अश्कों का कारोबार करते हो प्रेम मे पीड़ा है वियोग है बैचेनी है बहुत सारी फिर भी हमको याद करके क्यूँ खुद पर अत्याचार करते हो तुम्हारी वज़ह से अब तो खुशी रहने लगी है कर के घर अब तो तुम ही मुझे भी परेशान इश्क मे बेशुमार करते हो हमने कभी सोचा नहीं था जिंदगी मे आपका आना ऐसे ये आपकी मौजूदगी हक़ीक़त या कोई खुमार करते हो तुम ने दिखाया है रास्ता उलझनों से दूर निकलने का तुम्हारा अंदाज अलग सा और प्यार अंत ना पार करते हो

रोते रोते l said Shayri

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 कितने दूर आ गए निभाते निभाते लोग थक गए हैं अब तो आज़माते आज़माते भिगो कर खुद के अश्क से दर्द को धों दिए थक गए अश्क को सम्हालते सम्हालते चाहे जो हो अंजाम कल का परवाह नहीं आज का दिन गुज़ार दिए हंसते हंसते कोई नहीं मारेगा ताना काम के लिए सब कर दिया हमने घुटनों के थकते थकते हम जिए है शान से अभिमान से संस्कार को पाल कुछ और ख्वाब पूरे कर ले मरते मरते उलझनों को हमने दिखा दिया आईना वो समझी खुद का मायना हाथ काप रहे लिखते लिखते आसान नहीं है सबकुछ यूँ बयां कर पाना हमारे लिए सब किताब कहीं भीग ना जाए अश्कों के गिरते गिरते ये ज़रा सी मुक्तक ग़ज़ल सुना दिए अपने जीवन की  क्या कहेगा ज़माना ये सोच कर डरते डरते  पायल कुमारी ©️

दो ग़ज़ल जिंदगी की हकीकत

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 दो ग़ज़ल l ग़ज़ल l शायरी  1) क्या लाए हो और क्या साथ मे जाएगा शरीर का हिस्सा तुम्हारा राख मे जाएगा तेरा मेरा मोह के बंधन का है झमेला ये साथ बस श्मशान तक तेरा सगा जाएगा जल्दी करो हो रही है देर अब प्रतीक्षा नहीं ये बात तेरे अपनों से ही कहा जाएगा अभी बहुत समय है समझो अहमियत कार्य की साथ कहा तेरे ये सब स्वार्थ जाएगा दूसरों के लिए करना बुरा बोना कांटे ये अनुचित है ये रास्ता किसी एक दिन तेरी राहों से होकर जाएगा सुधार सकते हो तो सुधार लो अपने जीवन को क्यूंकि मरने के बाद तो कुछ किया ना जाएगा 2) हमने कह दी दास्ताँ हमारी अब बारी आई है इश्क़ की तुम्हारी कहते हो मोहब्बत है हमसे बे पनाह तुम्हें ले लेते हैं चलो अब इम्तहान तुम्हारी क्या पसंद है बताना ज़रा हमे खाने मे अभी पकडी जाएगी चोरी तुम्हारी इश्क बस कह देने भर से होता निभता नहीं समझने मे निकल जाएगी जिन्दगी तुम्हारी  कभी कोई शिकवा कभी कोई शिकायत करते हो  जब आएंगे सामने तो सील जाएगी जुबान तुम्हारी  अपनी तिश्नगी को ज़रा सम्भाल के रखो जनाब  लगती नहीं अच्छी ये जल्दबाजी तुम्हारी  प्रेम मे अक्सर होता है नाम प्रतीक्षा क...

Love ehsas Shayari

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 एहसास को खत्म होते देखा है  ये सपना सा मगर लगता नहीं है। पहले बेपनाह था सबकुछ  अब बूंद भर समन्दर बचता नहीं है। किसको दोष दे इस हक़ीक़त का  कोई किसी के लिए रुकता नहीं है।  अपने पेट को काटकर रोशन किया घर  त्याग मगर किसी को आज दिखता नहीं है। अफसोस करते या जी लेते हाल के साथ  मन तो साथ है दिल ही मानता नहीं है। बड़ी आफत होती है अब तो समझाने मे  अदालत है ये और सबूत भी पुख़्ता नहीं है। इश्क के अंत में यही मुकाम आता है शायद  दर्द ही दर्द है और कुछ बचता नहीं है।

क्या तुम ये जुल्म जुल्म शायरी

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 तुम जो ये मोहब्बत की बाते किया करते हो खुद सीखे हो या सुनी बाते किया करते हो मुझसे कहते हो प्रेम करते हो बे पनाह तुम क्या इसी खंजर से सबको हलाल करते हो तुम्हारी बातों को सुनकर कोई भी खो जाए शायद क्या तुम यही जादू सब पर प्रयोग किया करते हो बताओ मतलब हमको भी अपनी शायरी का ज़रा ये कौन है रदीफ़ काफिये मे जिसे जान जान किया करते हो जल के मन में उठी है अगन अधरों पर किसी और का नाम क्या तुम इसी तरह से दिल का काम तमाम किया करते हो बता दिया करो राज हमको भी छुपे है जो सीने मे तुम्हारे क्या ये ही वो माध्यम है जिससे प्रेम का सफर किया करते हो

दर्द l इश्क शायरी

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 दर्द ही दर्द समेट कर जीती हूं जिंदा रहने के लिए अश्क पीती हूं Dard shayri  

सितम

 सितम हर एक दिल पर खाए है हम फिर भी महफिल में हंस के आए हैं लोग देते रहे मिसाल हमारी सबके सामने उन्हें क्या पता कि किस हद से गुजर के आये हैं खून के छींटे पैरों के चौखट लाल ना करते तो पता ही नहीं चलता कि हम कांटों पर चलकर आ गए कैसी है ये जिन्दगी जो सिर्फ वियोग में बीती है हमारी कहने को तो हम खुदा के घर से भी होकर आ गए किसको क्या मिला ये तो मुकद्दर की बात है नसीब की बात है, हम अपनी तक़दीर के हिस्से का सबकुछ गंवा कर आ गए कोई क्या जी पाएगा हमारी तरह जिंदगी ज़माने में  हम तो वहां से लौट कर आए जहां पर लोग मरकर आ गए 

नाम आपका

 क्या हैं हम क्या हैं वज़ूद मेरा मेरे चेहरे मै दिखता है अक्स तेरा कैसे सोच लिया तूने की तुमसे दूर होकर जी लुंगी मैं ज़माने मे प्रीतम तेरी यादो मे बहते हैं अश्क और उन अश्कों मे दिखता है अश्क तेरा ज़रा सी मजबूरी है जो आ नहीं पाती बात करने तुमसे इतना भी कमजोर नहीं की टूट जाए ये इश्क मेरा तुम्हारे अलावा कोई चाहत नहीं है हमे अब ज़माने से दिल पर राज आपका हाथो मे नाम आपका 

मना लेते हैं ग़ज़ल

 दिल को बस यूँ बहला लेते हैं हाल अपना तन्हाई को सुना लेते हैं दर्द की रात कटकर आधी हुई अब तो आग खुसी की लगा लेते हैं अब तो तुमसे बात नहीं हुई कुछ दिन जनाब तुम रूठे हो अब तुम्हें मना लेते हैं जायज है तुम्हारा गुस्सा प्रेम अथाह है तुम्हें  छोड़ दो सारी शिकायत आओ गले लगा लेते हैं  मैंने भी वियोग सहा है बस कुछ कहा नहीं है  बैठो जरा पास मसले सारे बीच के सुलझा लेते हैं  कभी दूर मत जाना एहसास हो गया चार दिन मे  अहमियत का तुम्हारी माफ करना जो दिल दुखा लेते हैं  अब तो हर बार कोशिश करूंगी तुम्हारे हर दर्द को समझूँ  बहुत हुई तकरार अब तो और अपना बना लेते हैं  किसी ने सच कहा है कि दूरी से पता चलता है प्यार का  छूने उसके कदम उसे घर बुला लेते हैं  अब तो लिख दी मैंने माफी अपने शब्दों में आपके लिए  बस इससे ज्यादा लिखने मे तो जरा घबरा लेते हैं  तुम हो आधार मेरा यह बात जान लो और माफ करो  दूर जाने के ख्याल से दिल को दहला लेते हैं  #शायरी love शायरी sorry ghajal 

बंधन

 साथी तुम सा कोई क्या होगा किसी मन्नत का ये असर होगा हर बात जानते हो मन की बिना कहे मन के बंधन का ये सृजन होगा छल कपट की दुनिया में हर दिन नया किस्सा मगर हमारे इस निश्चल बंधन से पावन क्या होगा #बज़्म

जीवन क्या है

 उम्र का ये बंधन क्या है तुम बिन सब सुन ये जीवन क्या है आश है उल्लास है तुमसे पल पल रिश्ता बता रहा है विश्वास क्या है तुम्हें जीती हूं तुम्हें संजो ती हूं देखना तुम मेरी कविता क्या है तुम से परिपूर्ण है हर भाव मन के तुम बिन ये समन्दर रीता इसमे क्या है पग पग पर तुम बन के साया तुमने रिश्ते का मान बढ़ाया जब जब अश्क कोई नजरों मे आए तब तब तुमने साथ निभाया गम मे तुम थे तुम्ही ही तुम थे साथ मेरे मैं तुम्हें क्यूँ भूल जाऊन जब खुसी का मौका आया जीवन की कल्पना नहीं कर सकती तुम बिन तुम्हारे बिना अब तो आसरा क्या है प्राण से भी ज्यादा प्रिय हो अब तो तुम मेरे तुम्हें अपना बना लिया जग से मुझे करना क्या है Shayri Khas Shayari | खास शायरी

हाँ मैं लिखती हूँ

 हाँ मैं लिखती हूँ ..कविता  खोकर तुम्हारे ख्याल में लिखती हूँ .. मन में व्याप्त है सवाल कई जवाब के लिए लिखती हूँ .. नहीं पता है कि किसे कहते हैं इश्क  मैं तो बस तेरी बाते और तेरे लिए लिखती हूँ .. ढूँढती हूँ शब्दो में प्यार तुम्हारे  मर्यादा से लिपटे हुए शब्द छू लेते हैं मन  दूर हो जाते हैं शब्द से अंधकार हमारे  लेकर प्रेरणा तुमसे तुम्हारे खातिर लिखती हूँ ... नहीं है समझ मुझमें इतनी जो माहिर हो जाऊँ सीख कर तुमसे बाते सारी फिर गीत कोई लिखती हूँ जैसे किसी पत्ते पर ओस लगती है कंचन सी धूप में हाँ मैं तुम्हें उस बूंद मे निहित सात रंग लिखती हूँ अधरों पर मौन लिए अक्सर घूमती रहती हूँ तुम पडते हो मुझे गौर से इसलिए शिकायत लिखती हूँ तुमने दी है वज़ह लबों पर मुस्कान की मुझे पिया मैं तुम्हें इसलिए अक्सर अपनी पहचान लिखती हूँ Khas shayri, ishk shayri, love

मेरी उलझन

 मेरी उलझन का हल नहीं होता क्यूँ मेरा बेहतर कोई कल नहीं होता खुसी की आरज़ू करना गलत क्यूँ है क्यूं कुछ चीजों मे अन्तर नहीं होता लिखती हूँ तो शब्दों को छुपा के ज़माने वालों को पता है ये लेखन बे मतलब नहीं होता जब से आदत डाली है तुमने यूँ इश्क की गुजारा मेरा किसी पल नहीं होता तुम्हें सोच कर बस खोयी रहती हूँ मेरी मुश्किल का हल नहीं होता देखो अब तो सितारे भी गवाह है मेरे इश्क के यूँ बे वज़ह इन्हें रातों को कोई यूँ नहीं तकता