।। 2 lines shayari ।। जुदाई शायरी।। viral Shayari. ।।

चित्र
तेरे स्पर्श से ही तुझ में समा जाती हू..........।। कौन हू....? क्या हू...? सब कुछ भूल जाती हूँ.. ।।

मैं नारी

 मैं नारी...... अबला नही सबला 


मै नारी मेरा अस्तित्व क्या है मैं खुद नहीं जानती 

बचपन मे तानों बानो से बड़ी हुई, कभी गिरी 

कभी खड़ी हुई ठोकरे खा खा कर बड़ी हुई 

बड़ी होते ही भेज दिया ऐसी जगह जहां पर कई मुसीबत पडी हुई

 दो पहलू के बीच में उलझी रही एक ससुराल, दूजी ओर मायका 

दोनों मेरे अपने फिर भी अलग दोनों का जायका।


एक तरफ वो बचपन की यादें वो माँ का आंचल 

वो किसी जिद की फरियादें 

दूजी ओर सास ममता का रूप नहीं हर बात मे ताने 


एक अजीब सी चक्की मे पिसती रही हर पल 

सहे सारे दर्द सारे ताने मुझे सुनने वाला कौन 

यहां माँ नहीं थी, और यहां माँ जो थी वो माँ बनने को तैयार नहीं थी 


एक स्त्री को सबकुछ मिल जाता है सबकुछ 

मगर दुजी और किसी को नहीं मिलता कुछ भी क्यूँ? 



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