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हिंदी शायरी (Hindi me Shayari) - Read Best Shayari in Hindi हर वादा हर एक झूठा वादा किया गया। हम पर सितम कुछ ज्यादा किया गया। खुदा के खास हो ज़माना ये कहता रहा हमारे हिस्से की हर खुशी को आधा किया गया। मझधार मे है अब तो जिन्दगी की नाव समन्दर से बैर नहीं अब सौदा किया गया। सियासत इश्क और नसीब तीनों का पता नहीं क्या पूरा हो क्या अधूरा रहे जी वादा किया गया। ......... Khasshayri खास शायरी..... मुश्किल है ये इश्क़ के इम्तहान देना सनम मुश्किल है! ज़रा मेहरबानी करो रास्ता हमारा मुश्किल है!! हम दे रहे हैं लहू खुद का तुम्हें लिखना शायरी , त्रुटी के बिना लिखना कोई ग़ज़ल हमारा मुश्किल है !! कोई इनायत कोई असर कोई जादू काम करे अब , तेरी नजरो के शूल से बचपाना हमारा मुश्किल है!! तेरे ही ख्वाब अब तो दिन मे चार बार आते हैं तुझे छुपाना घर वालों से झूट बोलना हमारा मुश्किल है!! क्या करोगे कोई हादसा हमारे साथ हुआ तो क्या करोगे कोई दुआ कोई प्राथना कोई मन्नत क्या करोगे हमारे बिना रह पाते नहीं हो तुम ये कहते हो हमारे बिना रहना पडे तो फिर क्या करोगे त...
एहसास को खत्म होते देखा है ये सपना सा मगर लगता नहीं है। पहले बेपनाह था सबकुछ अब बूंद भर समन्दर बचता नहीं है। किसको दोष दे इस हक़ीक़त का कोई किसी के लिए रुकता नहीं है। अपने पेट को काटकर रोशन किया घर त्याग मगर किसी को आज दिखता नहीं है। अफसोस करते या जी लेते हाल के साथ मन तो साथ है दिल ही मानता नहीं है। बड़ी आफत होती है अब तो समझाने मे अदालत है ये और सबूत भी पुख़्ता नहीं है। इश्क के अंत में यही मुकाम आता है शायद दर्द ही दर्द है और कुछ बचता नहीं है।
जब दर्द लिखा हो l दर्द शायरी हिन्दी जब दर्द लिखा हो किस्मत में तो गिला क्या करे हर कदम पर कोई अपना समझे गलत तो भला क्या करे चाहत को जब मिल जाए हवस का खिताब इश्क में अफसोस करें या मायूस हों और भला क्या करे ज़माने की रीति देख मन में बैठ गया उसके अक्स कोई चेहरा जब ज़माने का हो तो आईना भला क्या करे उसके मांग का सिंदूर ना बन सके ना बन सके हक़ीक़त मे हमदर्द जब वो खुद दूर जाना चाहें तो भला क्या करे उसकी एक मुस्कराहट से दिन निकला करते थे खुशियो के उसके लहजे में गुस्सा ज्यादा हो जाए तो भला क्या करे उसका कहना है कि कोई किसी का नहीं होता है सब मतलबी, उसकी नजर सब को एक देखे तो भला क्या करे उसकी उदासियों के लश्कर मर जाए काश खुशियो से जंग मैं, हम उसके कंधों पर बोझ है तो भला क्या करे जो भी हो अंजाम कल का पता नहीं बिछड़ जाना हैं शायद अश्कों को बहाए या खुद को खत्म करे और भला क्या करे हादसों की शिकार हर हद टूट गई जिंदगी हादसों का शिकार हो गयी हमारी मोहब्बत ज़माने की हवा से बीमार हो गयी लूट रहे हैं लोग यक़ीन के गांव अपनी मर्जी से हर और वफा भी आज के दौर में जैसे बेवफाई का कारोबार हो...
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